वरिष्ठ निर्माता-निर्देशक जॉनी बक्शी का शनिवार रात कार्डिएक अरेस्ट की वजह से मुंबई में निधन हो गया। वे 82 साल के थे। उन्हें शुक्रवार सुबह सांस लेने में तकलीफ होने के बाद जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
बक्शी की बेटी प्रिया ने इस बारे में एक न्यूज एजेंसी को बताते हुए कहा, 'उन्हें शुक्रवार सुबह सांस लेने में दिक्कत होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनका कोविड-19 टेस्ट भी हुआ था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। उनका निधन देर रात 1.30 से 2 बजे के बीच कार्डिएक अरेस्ट की वजह से हुआ।' बख्शी के परिवार में उनके दो बेटे ब्रेडमैन और केनेडी के अलावा उनकी बेटी प्रिया है।
कुछ फिल्मों में एक्टिंग भी की
करीब चार दशक लंबे अपने करियर में बक्शी ने बतौर निर्माता 'मंजिलें और भी हैं' (1974), विश्वासघात (1977), 'रावण' (1984), मेरा दोस्त, मेरा दुश्मन (1984), 'फिर तेरी कहानी याद आई' (1993), भैरवी (1996) और 'कजरारे' (2010) जैसी कुछ अन्य फिल्मों का निर्माण किया और दो फिल्मों 'डाकू और पुलिस' (1992) और 'खुदाई' (1994) का निर्देशन भी किया। उन्होंने 'हार-जीत' (1990) और 'पापा कहते हैं' (1996) जैसी फिल्मों में एक्टिंग भी की थी।
सेलेब्स ने भी जताया दुख
बक्शी के निधन पर बॉलीवुड की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। इस दौरान अनुपम खेर, शबाना आजमी, कबीर बेदी और कुणाल कोहली समेत कई सेलेब्स ने सोशल मीडिया पर दुख जताया।
इस दौरान अनुपम खेर ने लिखा 'प्रिय जॉनी बक्शी के निधन की खबर के बारे में जानकर गहरे दुख में हूं। मुंबई में मेरे शुरुआती जीवन में वे एक प्रोड्यूसर, दोस्त, समर्थक और मोटिवेटर के रूप में जीवन का अहम हिस्सा थे। उनकी हंसी संक्रमण की तरह थी, जो आसपास के सभी लोगों को भी खुश कर देती थी। अलविदा मेरे दोस्त। ओम शांति।'

शबाना आजमी ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा, 'आज सुबह फिल्ममेकर जॉनी बक्शी के निधन के बारे में जानकर दुख पहुंचा... अपने बेहद शुरुआती करियर में उनके साथ एक फिल्म विश्वासघात की थी। उन्होंने सिनेमा में निवेश किया था। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदनाएं।'



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